आपकी कुंडली में भिन्नाष्टकवर्ग क्या है?
भिन्नाष्टकवर्ग अष्टकवर्ग का सूक्ष्म रूप है। जहाँ सर्वाष्टकवर्ग प्रत्येक भाव का सामूहिक अंक देता है, वहीं भिन्नाष्टकवर्ग सातों शास्त्रीय ग्रहों (सूर्य से शनि तक) में से प्रत्येक का स्वतंत्र बल अलग-अलग दिखाता है। हर ग्रह को अन्य ग्रहों तथा लग्न से अपने संबंधों के आधार पर प्रत्येक राशि में 0 से 8 तक बिंदु मिलते हैं। ऊँचा अंक बताता है कि वह ग्रह वहाँ प्रबल सहयोग देता है, और नीचा अंक उसकी दशा या गोचर में चुनौती का संकेत है।
बिंदु कैसे पढ़ें
हर ग्रह बारह राशियों में एक निश्चित संख्या में बिंदु बाँटता है — गुरु 56 बाँटता है, जबकि शनि केवल 39। किसी एक राशि में उस ग्रह का बल आँकने के लिए उसका अंक 8 में से देखें:
- 0–3कमजोर क्षेत्र — इस राशि में ग्रह को बहुत कम सहयोग मिलता है। यहाँ से गोचर में धैर्य, सावधानी और सचेत उपाय अपेक्षित हैं।
- 4सामान्य — यहाँ ग्रह तटस्थ है। फल किसी ग्रह-प्रेरणा से नहीं, आपके अपने प्रयास से मिलते हैं।
- 5–8अत्यंत शुभ — यहाँ ग्रह को प्रबल सहयोग प्राप्त है। इस राशि से गोचर प्रायः अवसर खोलता है।
प्रत्येक ग्रह की निश्चित सीमा
ये संख्याएँ कुंडली पर निर्भर नहीं करतीं — केवल बिंदुओं का बँटवारा बदलता है। इन्हीं का योग 337 बनता है, जो सर्वाष्टकवर्ग का कुल है।
सूर्य 48चंद्र 49मंगल 39बुध 54गुरु 56शुक्र 52शनि 39कुल 337
प्रस्तार अष्टकवर्ग क्या है?
प्रस्तार सारणी यह खोलकर दिखाती है कि किसी ग्रह को उसके बिंदु कहाँ से मिले। किसी ग्रह का अष्टकवर्ग आठ संदर्भ बिंदुओं से बनता है — सातों ग्रह और लग्न; यही “अष्ट” है। सारणी में 1 का अर्थ है कि उस संदर्भ बिंदु ने उस राशि को एक बिंदु दिया। सभी पंक्तियाँ जोड़ने पर उस ग्रह का भिन्नाष्टकवर्ग बनता है, इसलिए यह सारणी गणना को पूरी तरह पारदर्शी बना देती है।