स्वभाव एवं विशेषण
दशमी। दशमी (सौम्य प्रदा: सौम्यता बढ़ाने वाली)। अधिदेवता: मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार यम (मृत्यु के देवता)। एक अन्य मत: शुक्ल पक्ष में दंड्र/यम, कृष्ण पक्ष में सर्प। बृहत् संहिता में धर्मराज; पूर्व कालामृत में नाग बताया गया है।
अनुमत कार्य
मांगलिक कार्य, विवाह, उपनयन, अलंकार, शांति एवं पौष्टिक कार्य, प्रतिष्ठा, यात्रा, वाहन, हाथी, घोड़ा, गृह-प्रवेश, शासकीय कार्य। द्वितीया, तृतीया, पंचमी एवं सप्तमी तिथियों हेतु नियत कार्य दशमी तिथि में भी फलित होते हैं।
निषिद्ध कार्य एवं भोजन
निषिद्ध भोजन: नलिका शाक (अरुई की जड़ - Colocasia), परवल / पडोल। दशमी तिथि को उबटन स्नान पुत्र का नाश करता है। आंवला स्नान न करें।
वर्गीकरण एवं विशेषताएं
- नंदादि समूह
- पूर्णा तिथि (स्वामी: बृहस्पति)। शुक्ल पक्ष नाम: सौम्या; कृष्ण पक्ष नाम: मित्रा।
- नेत्र स्थिति
- शुक्ल पक्ष में दो-नेत्र तिथि; कृष्ण पक्ष में एक-नेत्र तिथि।
- कुल समूह
- कुलाकुल तिथि।
- अमृत-घटी
- 51वीं से 54वीं घटी (आरंभ से 20घं 00मि से 21घं 36मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 118°00'00" से 118°48'00")।
- विष-घटी
- 11वीं से 14वीं घटी (आरंभ से 4घं 00मि से 5घं 36मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 110°00'00" से 110°48'00")।
- निषिद्ध अवधि
- अंतिम 24 मिनट में तिथि गंडांत। 32वीं घटी पर तिथि कूपम्।
- मास शून्य
- मार्गशीर्ष (शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष)।
- दग्ध तिथि
- सूर्य कर्क राशि में (कृष्ण पक्ष), सिंह राशि में (कृष्ण पक्ष)। ज्ञानमंजरी: अगहन, भाद्रपद।
- वार दग्ध
- कोई नहीं।
- तिथि-शून्य नक्षत्र
- स्वाती।
- तिथि-शून्य लग्न
- सिंह, वृश्चिक।
- अशुभ लग्न
- वृषभ, मकर / कुंभ (पूर्णा तिथियां)।
- घात तिथियां
- वृषभ, कन्या, मीन जन्म राशियों के लिए घात। सिंह, कन्या, तुला, मकर के लिए अशुभ।
- विशेष योग
- बुधवार (सिद्ध/अमृत योग), सोमवार (रत्नाकुर योग), बुधवार (मृत्यु योग), गुरुवार (करकच योग)।
- दिशा शूल एवं योगिनी
- दिक् शूल: उत्तर; योगिनी: उत्तर।
शांति एवं दान
दसों दिशाओं की स्वर्ण-निर्मित देवियां, दस कलशों में स्थापित करें जिनमें नमक, गुड़, तिल, दही, घी, चावल आदि हों।