- नंदादि समूह
- पूर्णा तिथि (स्वामी: बृहस्पति)। शुक्ल पक्ष नाम: सौम्या; कृष्ण पक्ष नाम: मित्रा।
- नेत्र स्थिति
- शुक्ल पक्ष में एक-नेत्र तिथि; कृष्ण पक्ष में दो-नेत्र तिथि।
- कुल समूह
- अकुल तिथि।
- अमृत-घटी
- 54वीं से 57वीं घटी (आरंभ से 21घं 12मि से 22घं 48मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 58°36'00" से 59°24'00")।
- विष-घटी
- 8वीं से 11वीं घटी (आरंभ से 2घं 48मि से 4घं 24मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 49°24'00" से 50°12'00") [M.G.: 7-10]।
- निषिद्ध अवधि
- अंतिम 24 मिनट में तिथि गंडांत। 32वीं घटी पर तिथि कूपम्।
- मास शून्य
- पौष (शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष), माघ (शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष), फाल्गुन (कृष्ण पक्ष)।
- दग्ध तिथि
- सूर्य सिंह राशि में (शुक्ल पक्ष)।
- वार दग्ध
- मंगलवार (M.C., दैवज्ञ रामदीन, ऋषि बृहस्पति), शनिवार (दैवज्ञ रामदीन)।
- तिथि-शून्य नक्षत्र
- मघा।
- तिथि-शून्य लग्न
- मिथुन, कन्या।
- अशुभ लग्न
- वृषभ, मकर / कुंभ (पूर्णा तिथियां)।
- घात तिथियां
- वृषभ, कन्या, मीन जन्म राशियों के लिए घात। मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क के लिए अशुभ।
- विशेष योग
- बुधवार (सिद्ध योग), गुरुवार (अमृत योग), रविवार (रत्नाकुर योग), रविवार (मृत्यु योग), शनिवार (दग्ध योग), शुक्रवार (हुताशन योग), मंगलवार (कुलिक योग)।
- दिशा शूल एवं योगिनी
- दिक् शूल: दक्षिण; योगिनी: दक्षिण।