स्वभाव एवं विशेषण
प्रतिपदा (वृद्धि प्रदा: उन्नति एवं विस्तार देने वाली)। अधिदेवता: मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार अग्नि (अग्नि देव)। एक अन्य मत: शुक्ल पक्ष में अग्नि, कृष्ण पक्ष में ब्रह्मा। बृहत् संहिता में ब्रह्मा बताया गया है।
अनुमत कार्य
विवाह, यात्रा, गृह-प्रवेश, प्रतिष्ठा (यश, सम्मान), मुंडन, सीमंत जैसे संस्कार, केशांत, उपनयन, शांति एवं विकासात्मक कार्य, कृषि, नशीले पदार्थ एवं औषधि निर्माण, तेल लगाना, शय्या, आसन जैसी बैठने की वस्तुएं, पाषाण कार्य, वृक्ष-छेदन, मूर्तिकला, अलंकार (आभूषण, सजावट)। ध्यान दें: ये कार्य कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को करने चाहिए, शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को नहीं।
निषिद्ध कार्य एवं भोजन
प्रतिपदा को पेठा (कुम्हड़ा) एवं कुष्मांड नहीं खाना चाहिए। नीम की दातुन से दांत साफ नहीं करने चाहिए। काशीखंड में उल्लेख है कि प्रतिपदा तिथि को लकड़ी एकत्र करना (तथा दातुन हेतु लकड़ी का प्रयोग) सात पीढ़ियों के लिए अत्यंत अशुभ माना गया है। प्रतिपदा को मांस भक्षण, तेल लगाना एवं संभोग करने से चांडाल स्थिति प्राप्त होती है।
वर्गीकरण एवं विशेषताएं
- नंदादि समूह
- नंदा तिथि (स्वामी: शुक्र)। शुक्ल पक्ष नाम: बलि एवं सुमहती; कृष्ण पक्ष नाम: वृद्धि-कर्ता, मंगलप्रदा।
- नेत्र स्थिति
- शुक्ल पक्ष में अंधी तिथि; कृष्ण पक्ष में काणी (एक-नेत्र) तिथि।
- कुल समूह
- अकुल तिथि।
- अमृत-घटी
- 46वीं से 49वीं घटी (आरंभ से 18घं 00मि से 19घं 36मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 09°00'00" से 09°48'00")।
- विष-घटी
- 16वीं से 19वीं घटी (आरंभ से 6घं 00मि से 7घं 36मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 03°00'00" से 03°48'00")।
- निषिद्ध अवधि
- आरंभिक 24 मिनट में तिथि गंडांत। 51वीं घटी पर तिथि कूपम्। कृष्ण पक्ष में गलग्रह तिथि।
- मास शून्य
- कार्तिक (शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष)।
- दग्ध तिथि
- सूर्य मेष राशि में (शुक्ल पक्ष) / सिंह राशि में (शुक्ल पक्ष)।
- वार दग्ध
- शुक्रवार।
- तिथि-शून्य नक्षत्र
- उत्तराषाढा।
- तिथि-शून्य लग्न
- तुला, मकर।
- अशुभ लग्न
- सिंह, तुला, वृश्चिक, मकर।
- घात तिथियां
- मेष एवं वृश्चिक जन्म राशियों के लिए घात। मेष राशि के लिए अशुभ।
- विशेष योग
- शुक्रवार (सिद्ध योग), शनिवार (अमृत योग), रविवार (रत्नाकुर योग), रविवार (मृत्यु योग), बुधवार (विष योग), बुधवार (संवर्त योग), सोमवार (हुताशन योग), शनिवार (कुलिक योग)।
- दिशा शूल एवं योगिनी
- दिक् शूल: पूर्व; योगिनी: पूर्व।
शांति एवं दान
स्वर्ण से निर्मित अष्टदल कमल पुष्प पर भगवान ब्रह्मा को स्थापित करें एवं पूजा उपरांत दान करें।