- नंदादि समूह
- जया तिथि (स्वामी: मंगल)। शुक्ल पक्ष नाम: धर्मिणी; कृष्ण पक्ष नाम: लक्ष्मीवती।
- नेत्र स्थिति
- शुक्ल पक्ष में अंधी तिथि; कृष्ण पक्ष में दो-नेत्र तिथि।
- कुल समूह
- अकुल तिथि।
- अमृत-घटी
- 53वीं से 56वीं घटी (आरंभ से 20घं 48मि से 21घं 24मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 34°24'00" से 34°12'00")।
- विष-घटी
- 9वीं से 12वीं घटी (आरंभ से 3घं 12मि से 4घं 48मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 25°36'00" से 26°24'00") [ऋषि वसिष्ठ: 8-11]।
- निषिद्ध अवधि
- 7वीं घटी पर तिथि कूपम्। प्रदोष: रात्रि का प्रथम 1/8वां भाग (1 पहर)।
- मास शून्य
- आश्विन (शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष) तथा फाल्गुन (शुक्ल पक्ष)।
- दग्ध तिथि
- सूर्य तुला राशि में (शुक्ल पक्ष)।
- वार दग्ध
- बुधवार (M.C., दैवज्ञ रामदीन, M.G.), शुक्रवार (ऋषि बृहस्पति)।
- तिथि-शून्य नक्षत्र
- तीनों उत्तरा नक्षत्र (उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढा, उत्तर भाद्रपद)।
- तिथि-शून्य लग्न
- सिंह, मकर।
- अशुभ लग्न
- मिथुन, कन्या (जया तिथियां)।
- घात तिथियां
- सिंह, धनु, कुंभ जन्म राशियों के लिए घात। मिथुन राशि के लिए अशुभ।
- विशेष योग
- मंगलवार (सिद्ध योग), रविवार (अमृत/रत्नाकुर योग), रविवार (मृत्यु योग), गुरुवार (दग्ध योग), सोमवार (विष/हुताशन योग), गुरुवार (कुलिक योग)।
- दिशा शूल एवं योगिनी
- दिक् शूल: दक्षिण-पूर्व; योगिनी: दक्षिण-पूर्व।