- नंदादि समूह
- नंदा तिथि (स्वामी: शुक्र)। शुक्ल पक्ष नाम: बलि एवं सुमहती; कृष्ण पक्ष नाम: वृद्धि-कर्ता, मंगलप्रदा।
- नेत्र स्थिति
- शुक्ल पक्ष में एक-नेत्र तिथि; कृष्ण पक्ष में दो-नेत्र तिथि।
- कुल समूह
- कुलाकुल तिथि।
- अमृत-घटी
- 50वीं से 53वीं घटी (आरंभ से 19घं 36मि से 21घं 12मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 69°48'00" से 70°36'00")।
- विष-घटी
- 6ठी से 9वीं घटी (आरंभ से 2घं 00मि से 3घं 36मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 61°00'00" से 61°48'00") [B.J.S.: 12-15; M.G.: 7-10]।
- पक्ष-रंध्र निषिद्ध समय
- आरंभ से प्रथम 9 घटी (3घं 36मि) [N.S.: 7घ]।
- निषिद्ध अवधि
- आरंभिक 24 मिनट में तिथि गंडांत। 51वीं घटी पर तिथि कूपम्। प्रदोष: रात्रि का 1 घटी (24मि) तक का समय।
- मास शून्य
- श्रावण (शुक्ल पक्ष) तथा माघ (कृष्ण पक्ष)।
- दग्ध तिथि
- सूर्य मिथुन राशि में (कृष्ण पक्ष), वृश्चिक राशि में (कृष्ण पक्ष)। ज्ञानमंजरी: वैशाख, श्रावण।
- वार दग्ध
- गुरुवार (M.C., ऋषि बृहस्पति), सोमवार (M.G.)।
- तिथि-शून्य नक्षत्र
- रोहिणी।
- तिथि-शून्य लग्न
- मेष, सिंह।
- अशुभ लग्न
- सिंह, तुला, वृश्चिक, मकर।
- घात तिथियां
- मेष एवं वृश्चिक जन्म राशियों के लिए घात। कन्या राशि के लिए अशुभ।
- विशेष योग
- रविवार (सिद्ध योग), शुक्रवार (अमृत योग), बुधवार (रत्नाकुर योग), सोमवार (मृत्यु योग), सोमवार (दग्ध योग), शनिवार (विष योग), गुरुवार (हुताशन योग), सोमवार (कुलिक योग)।
- दिशा शूल एवं योगिनी
- दिक् शूल: पश्चिम; योगिनी: पश्चिम।