सत्कर्म, पुण्य कार्य तथा धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अनुकूल। इस पृष्ठ पर 2026 में हर सुकर्मा योग की सूची आपके स्थान के लिए आरंभ और समाप्ति समय सहित दी गई है।
नाम का अर्थ: सत्कर्म, उचित कार्य
सुकर्मा में *सु* (अच्छा) तथा *कर्म* (कार्य) मिलकर इस योग को सीधे सत्कर्म का नाम देते हैं। यह शुभ योगों में सम्मिलित है और चक्र के सर्वाधिक स्पष्ट रूप से नैतिक योगों में गिना जाता है — ऐसा समय जिसमें उचित आचरण विशेष फल देने वाला बताया जाता है।
मुहूर्त ग्रंथ सुकर्मा को धार्मिक अनुष्ठान, दान एवं हर उस कार्य के लिए अनुकूल मानते हैं जो सद्भावपूर्वक संपन्न हो — जहाँ कार्य करने का ढंग परिणाम जितना ही महत्वपूर्ण हो। इसका स्वभाव स्थिर एवं कल्याणकारी है, न कि आकर्षक अथवा नाटकीय।
इसका नाम ही सत्कर्म है, और मुहूर्त ग्रंथ इसे धार्मिक अनुष्ठान, दान तथा सदाचार अपेक्षित हर कार्य के लिए अनुकूल मानते हैं — यह एक स्थिर, कल्याणकारी योग है, किसी एक विशेष अनुष्ठान वर्ग तक सीमित नहीं।
नित्य योग सूर्य और चंद्रमा के देशांतर के योग (न कि अंतर, जैसा तिथि में होता है) पर आधारित 27 अवधियों में से एक है, प्रत्येक 13°20' चौड़ी। यह इसी पृष्ठ पर सूचीबद्ध रवि योग या सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे विशेष मुहूर्त योगों से भिन्न है — वे तिथि, नक्षत्र और वार के संयोजन से बनते हैं, जबकि नित्य योग हमेशा सक्रिय रहने वाला पंचांग का एक मूल अंग है।