स्वभाव एवं विशेषण
त्रयोदशी। त्रयोदशी (जया प्रदा: विजय दिलाने वाली)। अधिदेवता: मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार कामदेव (काम के स्वामी)। एक अन्य मत: शुक्ल पक्ष में कामदेव, कृष्ण पक्ष में सूर्य। बृहत् संहिता में काम बताया गया है।
अनुमत कार्य
अलंकार, प्रतिष्ठा, अग्नि-आधान, विवाह, यात्रा, गृह-प्रवेश, वस्त्र, युद्ध, उपनयन को छोड़कर सभी मांगलिक कार्य। द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी एवं दशमी तिथियों हेतु नियत कार्य त्रयोदशी तिथि में भी फलित होते हैं।
निषिद्ध कार्य एवं भोजन
उपनयन से बचें। निषिद्ध भोजन: श्रीफल, बेल (Aegle Marmelos), बैंगन। त्रयोदशी तिथि को शरीर पर उबटन नहीं लगाना चाहिए (धन का नाश करता है)। त्रयोदशी को आंवला स्नान नहीं करना चाहिए।
वर्गीकरण एवं विशेषताएं
- नंदादि समूह
- जया तिथि (स्वामी: मंगल)। शुक्ल पक्ष नाम: धर्मिणी; कृष्ण पक्ष नाम: लक्ष्मीवती।
- नेत्र स्थिति
- शुक्ल पक्ष में दो-नेत्र तिथि; कृष्ण पक्ष में अंधी तिथि।
- कुल समूह
- अकुल तिथि।
- अमृत-घटी
- 49वीं से 52वीं घटी (आरंभ से 19घं 12मि से 20घं 48मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 153°36'00" से 154°12'00")।
- विष-घटी
- 13वीं से 16वीं घटी (आरंभ से 4घं 48मि से 6घं 24मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 146°24'00" से 147°12'00") [वसिष्ठ: 9-12; दैवज्ञ/M.G.: 15-18]।
- निषिद्ध अवधि
- 7वीं घटी पर तिथि कूपम्। प्रदोष: प्रथम दो पहर (लगभग 6घं / 1/4वां भाग)। कृष्ण पक्ष में गलग्रह तिथि।
- मास शून्य
- ज्येष्ठ (शुक्ल पक्ष)।
- दग्ध तिथि
- सूर्य धनु राशि में (कृष्ण पक्ष)।
- वार दग्ध
- सोमवार (दैवज्ञ रामदीन)।
- तिथि-शून्य नक्षत्र
- चित्रा, स्वाती।
- तिथि-शून्य लग्न
- वृषभ, मीन (अथवा मेष)।
- अशुभ लग्न
- मिथुन, कन्या (जया तिथियां)।
- घात तिथियां
- सिंह, धनु, कुंभ जन्म राशियों के लिए घात। मेष राशि के लिए अशुभ।
- विशेष योग
- गुरुवार (सिद्ध/अमृत योग), शनिवार (रत्नाकुर योग), शुक्रवार (मृत्यु योग), सोमवार (करकच योग)।
- दिशा शूल एवं योगिनी
- दिक् शूल: दक्षिण; योगिनी: दक्षिण।
शांति एवं दान
13 ब्राह्मणों को स्नान कराएं, उन्हें सजाएं, वस्तुएं, वस्त्र, स्वर्ण आदि दान करें एवं उन्हें भोजन कराएं।