स्वभाव एवं विशेषण
पूर्णिमा। पूर्णिमा (सौम्य प्रदा: सौम्यता प्रदान करने वाली)। अधिदेवता: मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार चंद्रमा। एक अन्य मत: शुक्ल पक्ष में चंद्रमा। बृहत् संहिता में विश्वदेव बताया गया है।
अनुमत कार्य
सभी मांगलिक कार्य, धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ, शांति एवं पौष्टिक कार्य, प्रतिष्ठा, मंदिर, विवाह, चित्रकला, मूर्तिकला, कला, आभूषण, गृह, युद्ध।
निषिद्ध कार्य एवं भोजन
संभोग, तेल मालिश एवं उपनयन सर्वथा निषिद्ध हैं। पूर्णिमा को दूसरों द्वारा दिया गया भोजन नहीं लेना चाहिए। जुआ निषिद्ध है। नित्य अनध्याय तिथि।
वर्गीकरण एवं विशेषताएं
- नंदादि समूह
- पूर्णा तिथि (स्वामी: बृहस्पति)। शुक्ल पक्ष नाम: सौम्या।
- नेत्र स्थिति
- शुक्ल पक्ष में एक-नेत्र तिथि; कृष्ण पक्ष में अंधी तिथि।
- कुल समूह
- अकुल तिथि।
- अमृत-घटी
- 53वीं से 56वीं घटी (आरंभ से 20घं 48मि से 22घं 24मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 178°24'00" से 179°12'00")।
- विष-घटी
- 9वीं से 12वीं घटी (आरंभ से 3घं 12मि से 4घं 48मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 169°36'00" से 170°24'00")।
- निषिद्ध अवधि
- अंतिम 24 मिनट में तिथि गंडांत। 32वीं घटी पर तिथि कूपम्। पर्व तिथि।
- मास शून्य / दग्ध
- कोई नहीं।
- वार दग्ध
- रविवार (दैवज्ञ रामदीन)।
- तिथि-शून्य नक्षत्र / लग्न
- कोई नहीं।
- अशुभ लग्न
- वृषभ, मकर / कुंभ (पूर्णा तिथियां)।
- घात तिथियां
- वृषभ, कन्या, मीन जन्म राशियों के लिए घात। मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ, मीन के लिए अशुभ।
- विशेष योग
- शनिवार (रत्नाकुर योग)।
- दिशा शूल एवं योगिनी
- दिक् शूल: उत्तर-पश्चिम/उत्तर-पूर्व; योगिनी: उत्तर-पश्चिम/उत्तर-पूर्व।
शांति एवं दान
वृषोत्सर्ग करें, पूजा उपरांत चांदी में बनी चंद्रमा की प्रतिकृति दान करें।