स्वभाव एवं विशेषण
अमावस्या। अमावस्या (पितृ प्रदा: पितृ संबंधी कार्यों की तिथि)। अधिदेवता: मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार पितृ (पूर्वज)। एक अन्य मत: कृष्ण पक्ष में ईश्वरी। बृहत् संहिता में पितर बताया गया है।
अनुमत कार्य
धार्मिक कार्य, यज्ञ, दान, अग्निहोत्र, अग्न्याधान, पितृ कार्य। अमावस्या को पितृ कार्यों के अतिरिक्त सभी शुभ कार्य करने से वे नष्ट हो जाते हैं।
निषिद्ध कार्य एवं भोजन
संभोग के लिए अच्छा नहीं है। अमावस्या को दही/दूध नहीं मथना चाहिए, वृक्ष नहीं काटने चाहिए एवं मंत्र-पाठ नहीं करना चाहिए। नीम की दातुन से दांत साफ नहीं करने चाहिए। लकड़ी एकत्र न करें।
वर्गीकरण एवं विशेषताएं
- नंदादि समूह
- पूर्णा तिथि (स्वामी: बृहस्पति)। कृष्ण पक्ष नाम: मित्रा।
- नेत्र स्थिति
- कृष्ण पक्ष में अंधी तिथि।
- कुल समूह
- कुल तिथि।
- अमृत-घटी
- 53वीं से 56वीं घटी (आरंभ से 20घं 48मि से 22घं 24मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 358°24'00" से 359°12'00")।
- विष-घटी
- 9वीं से 12वीं घटी (आरंभ से 3घं 12मि से 4घं 48मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 349°36'00" से 350°24'00")।
- निषिद्ध अवधि
- अंतिम 24 मिनट में तिथि गंडांत। 32वीं घटी पर तिथि कूपम्। गलग्रह तिथि। पर्व तिथि। नित्य अनध्याय तिथि।
- मास शून्य / दग्ध
- कोई नहीं।
- वार दग्ध
- कोई नहीं।
- तिथि-शून्य नक्षत्र / लग्न
- कोई नहीं।
- अशुभ लग्न
- वृषभ, कन्या, मीन।
- घात तिथियां
- वृषभ, कन्या, मीन जन्म राशियों के लिए घात। कुंभ, मीन, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर के लिए अशुभ।
- विशेष योग
- कोई नहीं।
- दिशा शूल एवं योगिनी
- दिक् शूल: उत्तर-पश्चिम/उत्तर-पूर्व; योगिनी: उत्तर-पश्चिम/उत्तर-पूर्व।
शांति एवं दान
पितृ श्राद्ध, दान, यज्ञ, अग्निहोत्र।