स्वभाव एवं विशेषण
चतुर्दशी। चतुर्दशी (उग्र प्रदा: आक्रामकता बढ़ाने वाली)। अधिदेवता: मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार शिव (विनाश के स्वामी - हिंदू त्रिदेव में से एक)। एक अन्य मत: शुक्ल पक्ष में रुद्र, कृष्ण पक्ष में कामदेव। बृहत् संहिता में काली; पूर्व कालामृत में भी काली बताया गया है।
अनुमत कार्य
अशुभ कार्य, विषप्रयोग, छल से आक्रमण, युद्ध, शस्त्र, हथियार निर्माण, अग्नि, शत्रु को गिरफ्तार करना, क्रूर कार्यों में सफलता, इस्पात।
निषिद्ध कार्य एवं भोजन
मांगलिक कार्यों, यात्रा एवं केश-कर्तन/मुंडन के लिए अशुभ। निषिद्ध भोजन: आंवला (Myrobalans), शहद। चतुर्दशी को केश-कर्तन एवं मुंडन सर्वथा निषिद्ध है (विनाश की ओर ले जाता है)। चतुर्दशी को संभोग, तेल लगाना एवं मांस भक्षण चांडाल स्थिति की ओर ले जाते हैं।
वर्गीकरण एवं विशेषताएं
- नंदादि समूह
- रिक्ता तिथि (स्वामी: शनि)। शुक्ल पक्ष नाम: यशोवती; कृष्ण पक्ष नाम: यशदाता।
- नेत्र स्थिति
- शुक्ल पक्ष में एक-नेत्र तिथि; कृष्ण पक्ष में अंधी तिथि।
- कुल समूह
- कुल तिथि।
- अमृत-घटी
- 54वीं से 57वीं घटी (आरंभ से 21घं 12मि से 22घं 48मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 166°36'00" से 167°24'00")।
- विष-घटी
- 8वीं से 11वीं घटी (आरंभ से 2घं 48मि से 4घं 24मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 157°24'00" से 158°12'00")।
- पक्ष-रंध्र निषिद्ध समय
- आरंभ से प्रथम 5 घटी (2घं 00मि) [N.S.: 5घ]। कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (रिक्ता + भद्रा) का प्रथमार्ध सदैव त्याज्य है।
- निषिद्ध अवधि
- 22वीं घटी पर तिथि कूपम्। कृष्ण पक्ष में गलग्रह तिथि। कृष्ण पक्ष में पर्व तिथि। नित्य अनध्याय तिथि।
- मास शून्य
- आषाढ़ (कृष्ण पक्ष) तथा पौष (शुक्ल पक्ष)।
- दग्ध तिथि
- कोई नहीं।
- वार दग्ध
- कोई नहीं।
- तिथि-शून्य नक्षत्र
- आश्लेशा।
- तिथि-शून्य लग्न
- कोई नहीं।
- अशुभ लग्न
- मेष, कर्क (रिक्ता तिथियां)।
- घात तिथियां
- तुला एवं मकर जन्म राशियों के लिए घात। वृषभ राशि के लिए अशुभ।
- विशेष योग
- शुक्रवार (सिद्ध योग), शुक्रवार (रत्नाकुर योग), रविवार (करकच योग)।
- दिशा शूल एवं योगिनी
- दिक् शूल: पश्चिम; योगिनी: पश्चिम।
शांति एवं दान
स्वर्ण में महिषी की मूर्ति बनाएं, इसे जल के कलश पर रखें, मूर्ति को सजाएं; और इसके साथ एक बैल की मूर्ति भी रखें।