स्वभाव एवं विशेषण
द्वादशी। द्वादशी (यश प्रदा: यश देने वाली)। अधिदेवता: मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार विष्णु (पालन के स्वामी - हिंदू त्रिदेव में से एक)। एक अन्य मत: शुक्ल पक्ष में विष्णु, कृष्ण पक्ष में मृड। बृहत् संहिता में सविता (सूर्य) बताया गया है। लोमश संहिता में भगवान विष्णु द्वारा शासित द्वादशी तिथि को समस्त तिथियों में सर्वश्रेष्ठ बताया गया है (चाणक्य नीति: "द्वादशी तिथि से बढ़कर कोई दिन नहीं है")।
अनुमत कार्य
सभी प्रकार के कार्यों हेतु उपयुक्त - चर एवं स्थिर कार्य, शांति एवं पौष्टिक कार्य, अन्नप्राशन, उपनयन, विवाह। इस पृथ्वी पर यात्रा एवं अन्नप्राशन को छोड़कर सभी गतिविधियां (स्थिर एवं चर) द्वादशी तिथि को फलित होती हैं। द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी एवं दशमी तिथियों हेतु नियत कार्य त्रयोदशी तिथि में भी फलित होते हैं।
निषिद्ध कार्य एवं भोजन
यात्रा, नए गृह में प्रवेश, तेल मालिश एवं अन्नप्राशन से बचें। निषिद्ध भोजन: कदलीफल, चर्म, मसूर दाल। ऋषि बृहस्पति सावधान करते हैं कि जब द्वादशी तिथि अशुभ वार, अशुभ लग्न एवं अशुभ वर्गों से मेल खाए, तो कोई भी शुभ कार्य आरंभ नहीं करना चाहिए।
वर्गीकरण एवं विशेषताएं
- नंदादि समूह
- भद्रा तिथि (स्वामी: बुध)। शुक्ल पक्ष नाम: उग्र कर्मा; कृष्ण पक्ष नाम: बाला एवं खला।
- नेत्र स्थिति
- शुक्ल पक्ष में दो-नेत्र तिथि; कृष्ण पक्ष में अंधी तिथि। काणी-तिथि भी।
- कुल समूह
- कुल तिथि।
- अमृत-घटी
- 51वीं से 54वीं घटी (आरंभ से 20घं 00मि से 21घं 36मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 142°48'00" से 143°36'00")।
- विष-घटी
- 11वीं से 14वीं घटी (आरंभ से 4घं 00मि से 5घं 36मि; चंद्र-सूर्य कोणीय अंतर: 134°00'00" से 134°48'00") [वसिष्ठ/दैवज्ञ: 14-17; M.G.: 13-16]।
- पक्ष-रंध्र निषिद्ध समय
- आरंभ से प्रथम 10 घटी (4घं 00मि) [N.S.: 14घ]।
- निषिद्ध अवधि
- 29वीं घटी पर तिथि कूपम्। प्रदोष: रात्रि का 1 घटी (24मि) तक का समय।
- मास शून्य
- वैशाख (शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष)।
- दग्ध तिथि
- सूर्य मेष राशि में (कृष्ण पक्ष), मकर राशि में (कृष्ण पक्ष)। ज्ञानमंजरी: माघ, कार्तिक।
- वार दग्ध
- रविवार (M.C., ऋषि बृहस्पति, M.G.)।
- तिथि-शून्य नक्षत्र
- आश्लेशा।
- तिथि-शून्य लग्न
- तुला, मकर।
- अशुभ लग्न
- धनु, मीन (भद्रा तिथियां)।
- घात तिथियां
- मिथुन एवं कर्क जन्म राशियों के लिए घात। मीन राशि के लिए अशुभ।
- विशेष योग
- शनिवार (सिद्ध/अमृत योग), मंगलवार (रत्नाकुर योग), शनिवार (मृत्यु योग), मंगलवार (करकच योग)।
- दिशा शूल एवं योगिनी
- दिक् शूल: दक्षिण-पश्चिम; योगिनी: दक्षिण-पश्चिम।
शांति एवं दान
गाय, बैल, स्वर्ण, सप्त-धान्य, गुड़, फल, सुगंधित वस्तुएं।