अशुभ माना जाता है — बाधा और जोखिम से जुड़ा; संकटपूर्ण कार्यों में सावधानी अपेक्षित है। इस पृष्ठ पर 2026 में हर अतिगण्ड योग की सूची आपके स्थान के लिए आरंभ और समाप्ति समय सहित दी गई है।
नाम का अर्थ: महान संकट अथवा कष्ट
अतिगण्ड में *अति* (अत्यधिक) तथा *गण्ड* (गाँठ अथवा संकट) मिलकर एक ऐसा नाम बनाते हैं जिसका अर्थ स्पष्टतः "महान कष्ट" है। यह उन नौ योगों में से एक है जिन्हें शास्त्रीय मुहूर्त अशुभ मानता है, और यह विशेष रूप से हल्के विलंब के बजाय जोखिम एवं दुर्घटना से जुड़ा है।
इसी संबंध के कारण ग्रंथ अतिगण्ड में हर जोखिम भरे कार्य हेतु विशेष सावधानी की सलाह देते हैं — दुर्गम मार्गों से यात्रा, तीक्ष्ण उपकरण अथवा अग्नि से जुड़े कार्य, तथा वे उद्यम जिनमें दुर्घटना महंगी सिद्ध हो। इसे सर्वथा विनाशकारी नहीं, अपितु ऐसा योग माना जाता है जिसमें जोखिम को अतिरिक्त महत्व देना आवश्यक है।
इसका नाम "अत्यधिक" और "संकट" के मेल से बना है, और मुहूर्त ग्रंथ इसे ऐसा योग मानते हैं जिसमें दुर्घटना एवं बाधा की संभावना अन्य योगों की तुलना में अधिक होती है। इसीलिए इसमें यात्रा, अग्नि, तीक्ष्ण उपकरण जैसे जोखिम भरे कार्यों में विशेष सावधानी की सलाह दी जाती है।
नित्य योग सूर्य और चंद्रमा के देशांतर के योग (न कि अंतर, जैसा तिथि में होता है) पर आधारित 27 अवधियों में से एक है, प्रत्येक 13°20' चौड़ी। यह इसी पृष्ठ पर सूचीबद्ध रवि योग या सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे विशेष मुहूर्त योगों से भिन्न है — वे तिथि, नक्षत्र और वार के संयोजन से बनते हैं, जबकि नित्य योग हमेशा सक्रिय रहने वाला पंचांग का एक मूल अंग है।