दो सर्वाधिक अशुभ योगों में से एक — परंपरागत रूप से वर्जित, विशेषकर मांगलिक संस्कारों के लिए। इस पृष्ठ पर 2026 में हर वैधृति योग की सूची आपके स्थान के लिए आरंभ और समाप्ति समय सहित दी गई है।
नाम का अर्थ: विधृति, वियोग
वैधृति सत्ताईस नित्य योगों के चक्र का समापन करता है, और इसका नाम — विधृति अथवा वियोग — वस्तुओं के बने रहने के बजाय बिखरने का प्रतीक माना जाता है। यह व्यतीपात के साथ उन दो योगों में से एक है जिन्हें शास्त्रीय मुहूर्त सर्वाधिक अशुभ मानता है।
परंपरागत अभ्यास वैधृति में लगभग हर प्रकार के मांगलिक कार्य से बचता है — विशेषकर विवाह एवं समारोह — तथा इसे, अपने समकक्ष व्यतीपात की भाँति, केवल तपस्यापूर्ण अथवा सुधारात्मक अनुष्ठान के लिए उपयुक्त मानता है, किसी भी प्रकार के आरंभ के लिए नहीं।
इसका नाम विधृति अथवा वियोग है, और शास्त्रीय मुहूर्त इसे व्यतीपात के साथ उन दो योगों में रखता है जिनसे लगभग हर मांगलिक कार्य को दूर रखा जाता है। सत्ताईस योगों में अंतिम होने के कारण इसे उस बिंदु के रूप में भी देखा जाता है जहाँ चक्र पुनः आरंभ होने से पूर्व बिखरता है।
नित्य योग सूर्य और चंद्रमा के देशांतर के योग (न कि अंतर, जैसा तिथि में होता है) पर आधारित 27 अवधियों में से एक है, प्रत्येक 13°20' चौड़ी। यह इसी पृष्ठ पर सूचीबद्ध रवि योग या सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे विशेष मुहूर्त योगों से भिन्न है — वे तिथि, नक्षत्र और वार के संयोजन से बनते हैं, जबकि नित्य योग हमेशा सक्रिय रहने वाला पंचांग का एक मूल अंग है।